जिदंगी : धुप ,बारिश और बसंत के बीच

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मौसम… ये सिर्फ प्रकृति का बदलाव या आसमान के बदलते रंग नहीं होते, बल्कि हर मौसम अपने साथ एक एहसास लेकर आता है। गर्मी अपने साथ लाती है तेज धूप, तपिश, बेचैनी और हमें झुलसाती है। लेकिन साथ ही सिखाती है धैर्य और संघर्ष भी—कि थोड़ा सब्र रखना है, कुछ दिनों की ही बात है। फिर आती है बरसात। अपने साथ लाती है नई उम्मीद, ताज़गी, बूंदों की ठंडक और मिट्टी की सौंधी खुशबू।सर्दी के मौसम में ठिठुरन और खामोशी तो होती ही है, लेकिन इसके साथ एक अजीब-सी शांति भी छा जाती है। कंबल में घुसकर खुद के साथ समय बिताने का मौका मिलता है। और फिर आता है बसंत। हरियाली, फूलों की महक, पत्तों के नए रंग, नई कोपलों की मुस्कान—सब मिलकर नई उम्मीदें जगाते हैं। जैसे किसी लंबे ठंड के बाद जिंदगी फिर से खुशियों के रंगों से सज उठी हो।

मैं सोचती हूं, मेरी जिंदगी भी इन्हीं मौसमों जैसी है। कभी चुनौतियों भरी गर्मी की धूप इतनी तेज़ होती है कि सबकुछ झुलसा देती है, और मैं उसे झेलते हुए आगे बढ़ती जाती हूं। कभी लगता है कि मैं बारिश की बूंदों जैसी हूं—स्वच्छंद, बेपरवाह और अनियंत्रित। बारिश मुझे मेरे दोस्तों की याद दिलाती है। उनके आने से मेरी तपती जिंदगी में खुशियों की फुहार आ गई। और उनके न होने पर—बस कीचड़ भरी सड़क, जहाँ मन तो नहीं करता चलने का, पर विकल्प न होने के कारण आगे बढ़ना ही पड़ता है। कभी-कभी मैं सर्दी के दिनों जैसी लगती हूं। ठंड इतनी कि भीतर तक सून्न पड़ जाती हूं। पर जब कंबल में छुपकर अकेली खुद से बातें करती हूं, तो अपने भीतर झाँकने का मौका मिलता है। वही धूप, जो कुछ वक्त पहले तक झुलसा रही थी, अब अच्छी लगने लगती है। और समझ आता है कि जिंदगी में हर चीज चाहिए—बस सही समय पर। कई बार मैं बसंत की तरह भी लगती हूं। मेरे सपनों की तरह, जहाँ हर बार गिरने के बाद फिर से उठने की हिम्मत मिलती है। हर ठंडी रात के बाद नई सुबह की उम्मीद, हर पतझड़ के बाद फूलों की तरह नए अवसर।

अगर मुझसे कोई पूछे कि मेरा पसंदीदा मौसम कौन सा है, तो मैं हमेशा बसंत ऋतु ही कहूँगी। क्योंकि ये मेरे लिए सिर्फ एक मौसम नहीं बल्कि एक एहसास है। ये मुझे याद दिलाता है कि चाहे पतझड़ कितना भी हो, फूल तो फिर से खिलेंगे ही। शायद मेरी जिंदगी भी उसी बसंती एहसास जैसी है—थोड़ी नाजुक, थोड़ी रंगीन और सबसे ज्यादा उम्मीदों से भरी हुई।

तो बताइए, अगर आपकी जिंदगी एक मौसम होती तो कौन सा होता?

One thought on “जिदंगी : धुप ,बारिश और बसंत के बीच

  1. Beautifully written the way life is compared to seasons feels so perfect and inspiring.Every line carries emotion, hope, and quiet strength.

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